
कभी कहा जाता था “बेटी को संभालकर रखो”, अब समझदार लोग कहते हैं “बेटे को समझदार बनाओ।” समाज evolve हो रहा है। ऐसे में एक पिता की भूमिका सिर्फ कमाने वाले की नहीं, बल्कि character builder की भी है।
बेटे को यह सिखाना जरूरी है कि ताकत का मतलब दबाना नहीं, संभालना होता है।
1. Respect is the Real Power
सबसे पहली नसीहत Respect सबके लिए। चाहे दोस्त हो, सहपाठी हो, colleague हो या partner। Consent क्या होता है, boundaries क्या होती हैं ये बातें घर से ही शुरू होती हैं। हीरो वही है जो खुद पर कंट्रोल रखे।
2. Digital दुनिया में भी सजग रहो
आज की गलती सिर्फ गली में नहीं, गूगल पर भी पकड़ में आ जाती है। Online comments, chats, reels सब permanent footprints हैं।
बेटे को सिखाइए कि digital behavior भी character का हिस्सा है।
3. गुस्सा नहीं, संवाद
बहस होगी। असहमति होगी। लेकिन आवाज ऊंची करना जीत नहीं है। एक mature लड़का वही है जो सुन सके, समझ सके और जरूरत पड़े तो माफी भी मांग सके। Ego से ज्यादा जरूरी empathy है।
4. बराबरी को खतरा नहीं, अवसर समझो
Strong women से डरने की नहीं, inspire होने की जरूरत है। Competition healthy हो सकता है, insecurity नहीं। बेटे को बताइए कि equality से उसका कद छोटा नहीं, सोच बड़ी होती है।

आजकल “sigma male” बनने का ट्रेंड है। लेकिन असली confidence memes से नहीं, manners से आता है। दुनिया बदल रही है, बेटा भी upgrade हो। Software नहीं, सोच update करो।
5. खुद की इज़्जत, दूसरों की इज़्जत
Self-respect और respect for others साथ चलते हैं। अगर कोई गलत आरोप या विवाद की स्थिति आए, तो panic नहीं, legal awareness जरूरी है। समझदारी ही असली कवच है।
बेटे को डराकर नहीं, समझाकर बड़ा करें। उसे यह सिखाएं कि इंसान पहले बने, जेंडर बाद में। क्योंकि अच्छे संस्कार trending नहीं होते, लेकिन timeless जरूर होते हैं।
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यह लेख सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक पालन-पोषण के दृष्टिकोण से लिखा गया है। इसका उद्देश्य किसी भी जेंडर, वर्ग या समुदाय को लक्षित करना नहीं है, बल्कि पारस्परिक सम्मान और जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।
